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नौ महीने बाद, भारतीय सेना ने तीन दिन पहले रोहित नेगी पुत्र अमर सिंह का पार्थिव शरीर खोज निकाला. शहीद रोहित नेगी ने कश्मीर सीमा पर अपनी सेवाएं देते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया. भारतीय सेना उनके पार्थिव शरीर को 8 जुलाई को कारगिल से लेह लेकर आई. वहां से उनका पार्थिव शरीर चंडीगढ़ और फिर चोलिंग पहुंचाया गया. चोलिंग से वाहन मार्ग द्वारा पार्थिव देह उनके पैतृक गांव तराण्डा लाई गई. जैसे ही उनकी पार्थिव देह गांव पहुंची रोहित नेगी अमर रहे के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद रोहित नेगी का आज अंतिम संस्कार किया गया. सैकड़ों की भीड़ ने अपने लाड़ले को नम आंखों से विदाई दी. इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया. रोहित नेगी सेना की डोगरा रेजिमेंट में कार्यरत थे.रोहित नेगी की शहादत से उनके परिवार, गांव समेत प्रदेश में शोक की लहर है. लोगों ने कहा कि रोहित नेगी देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है. उनका ये बलिदान देश सेवा के लिए आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा. उनकी वीरता और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा. लोगों ने कहा कि रोहित नेगी बहुत ही मिलनसार थे. उनके जाने की कमी पूरे गांव को खलेगी.





